Saturday, November 19, 2011

काश ! “और वे लम्हे ? (खंड ३)


काश ! और वे लम्हे  ......................???
 (खंड ३) 

 "अरे धीरेन  , सुबह सुबह कहाँ चल दिए" ? बाबूजी ने पूछा 

"जी बी. डी. ओ.  साहब के यहाँ पास के लिए जा रहा हूँ अभी भेंट नहीं हुयी तो फिर वे मेला के दौरे पे निकल जायेंगे" 

"बड़े भैया, कितने लोगों का पास बनवाँ लूं" 

"बीस पच्चीस पास तो बनवा ही लेना, और चार पांच पास सेकंड क्लास का भी, ई पोखरिया, गंगवा, महराज और बदरिया सभै  देख लेगा सिनेमा, और हो सके लड़कन सब के लिए सर्कस का भी पास बनवा लेना, नय तो  सर्कस देखने के लिए सब जरूरे हल्ला मचाएगा” 

"जी बड़े भैया, हो जायेगा, आप चिंता मत करिए," इतना कह कर धीरेन   अपनी साईकिल पर सवार  हो ब्लॉक की ओर निकल पड़ा  ब्लॉक पहुंचते ही बी. डी. ओ.  साहब से भेंट हो गयी, बी. डी. ओ.  साहब ने धीरेन   को देखते ही बड़े तपाक से कहा, "अरे धीरेन  , सुबह सुबह इतनी जल्दी, सब खैरियत तो है न ?

"जी बी. डी. ओ.  साहब, आपकी दया से सब कुशले मंगल है,  बड़े भैया ने कहा कि घर में सब को मेला घूमा लाओ, "नागिन" फिलिम देखने का उनको बहुते मन है, इसलिए हम आपकी सेवा में हाज़िर हो गए 

बी. डी. ओ.  साहब बड़े दूरदर्शी थे, उन्हों ने धीरेन   के मन की बात भांप ली थी, बोले, "अरे इसमें क्या है, कितना लोग का पास चाहिए, और कौन दिन का” ?

"जी, ईतवार का , सिनेमा का पच्चीस और सर्कस का बीस ठो" 

"अरे धीरेन   तुम तो जानते हो कि अभी पहला ही हफ्ता है, पच्चीस पास ज्यादा हो जायेगा 

"अब हम तो सब को बोल आयें हैं कि पास का इन्तेजाम हो जायेगा, उस पर बड़की भौजी ने ईतवार का दिन फिक्स किया है, आप तो जानते ही हैं कि बड़की भौजी को हम सभी माँ जैसा ही मानते हैं, और आपको भी कितना मानती हैँ वो,  अब सब बस मेरा ही इन्तेजार कर रहें होंगे कि धीरेन पास लेकर आता ही होगा,  अब अगर पच्चीस पास का इन्तेजाम नहीं हुआ तो हम किस किस  को मना करेंगे और आपके रहते क्या मूहँ लेकर लौटेंगे, अब आप ही फैसला कर लीजिये  

धीरेन   के बोलने का अंदाज ऐसा था कि बी. डी. ओ.  साहब एकदम चुप हो गए और बोले "अच्छा ठीक है, हम विजय टाकिज केमैनजर के नाम से चिठ्ठा काट देते हैं, जाकर मिल लो, और सर्कस के लिए चिंता मत करोमेला जाकर तहसीलदार से मिल लेना, वह बोल देगा सर्कस कंपनी के मैनजर को 

"अरे धीरेन  , इस बार तुम नौटंकी का जिक्र नहीं किये  ? पता है, गुलाबो बाई और बिमला बाई दोनों आयी  है, नौटंकी देखने का कब प्रोग्राम बना रहे हो ?

"प्रोग्राम हम बनाते है न, दरोगा जी से भी बात कर लेंगे फिर आपको बताते हैं 

"अच्छा, अभी हम मेला का सब इन्तेजाम देखने जा रहें हैं, कोई दिक्कत हो तो मेला में तहसीलदार से मिल लेना, हम उसको हिदायत दे देंगे 

"जी, हम भी निकलते हैं", इतना कह कर धीरेन   प्रणाम कर घर की ओर निकल पड़ा, बहुत खुश थाचलो बड़का काम हो गयाहम तो सब को दिलासा दे चुके थे, मेरी इज्जत का तो आज बस फलूदा बनते बनते रह गया, मन ही मन धीरेन   ने बी. डी. ओ. साहब का धन्यबाद ज्ञापन किया  घर पहुंचते ही धीरेन ने सब से पहले बाबूजी  को और फिर अपनी बड़की भौजी को यह खुश खबरी दी कि पास का इन्तेजाम हो गया है, इतवार को मेले का प्रोग्राम पक्का, सब ने  राहत  की सांस ली, इसी पास के ऊपर  मेले का पूरा प्रोग्राम जो फिक्स था 

और आज ईतवार का दिन आ ही गया, सुबह से सब मेले जाने की तैयारी में जुट गए, सब को बस एक फिकर सताए जा रही थी कि आज कौन सा कपड़ा पहनना है, सभी अपने सबसे अच्छे कपडे छाँट छाँट कर अलग कर रहे थे घर की औरतें मैचिंग  साड़ी बलाउज पसंद कराने में जुटी थी, तो कोई इसतरी कराने की फ़िक्र मेँ था, ऐसा लग रहा था कि कोई उत्सव में जाने की तयारी हो रही है । कौशल्या देवी ने महराज को दिन का  खाना  आज जल्दी बना लेने ले लिए सारी हिदायतें दे डाली, फिर धीरेन  से पूछा, "अरे धीरेन  , मेला जाने के लिए समप्नी और  टप्पर गाडी के गाडीवान को खबर कर दी है न" 

"जी बड़की भौजी, राम खेलावन और सरजुगवा दोनों को हम कल्हे बोल दिए थे, अब बस आते ही होंगे" 

"फिर उन्हों ने अपने पति से पूछा "ए जी आपका क्या प्रोग्राम है" ?

"ऐसा करो कि तुम सभी लोग दिन में मेला के लिए निकलोहम शाम में अपने टमटम (एक्का गाडी) पर सिनेमा के टाइम पर पहुँच जायेंगे", बाबूजी ने कहा   

"ठीक है, वैसे भी सर्कस का शो  तो हम लोग तीन  बजे देखने वाले हैं, आपको तो सर्कस में कोई दिलचस्पी है नहीं, वही ठीक  रहेगापर आप साढ़े पांच बजे तक जरूर से पहुँच जाईयेगा  

"हम लोग यहाँ से एक बजे मेला के लिए निकले, क्यों धीरेन  " ?

"जी भौजी, एक बजे तक तो निकलना ही पड़ेगायहाँ से लगभग एक डेढ़ घंटा तो जाने में लग ही जायेगा 

"कौशल्या देवी ने कहा कि ठीक है, सब को बोल दो कि दिन का खाना वाना सब जल्दी ख़तम कर ले, और सिनेमा के बाद रात का खाना मेला में ही सब लोग खा लेंगे", इतना कह कर कौशल्या देवी सारे इन्तेजाम में लग गयी 
तभी बाहर सड़क पर बैंड बाजे कि धुन सुनायी पडी, सभी उत्सुकता वश बरामदे में आकर खड़े हो गए, बैंड पार्टी के साथ माइक  पर कोई  उदघोषणा  कर रहा था ............................................................... !

"सुनिए सुनिए सुनिए, फारबिसगंज के निवासियों सुनिए, आपके शहर फारबिसगंज मेले में इस बार ओरिएंटल सरकस नए नए खेल लेकर आया है, ढेर सारे दिल दहलाने वाले खेल, जान की बाजी लगा कर हवा में झूलने वाले खिलाडियों का खेल, जिनके साथ जांबाज लड़कियों को हवा में तैरते हुए देख कर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगेनए नए करतब लेकर आपके अपने शहर में इन सब को लेकर पहली बार आया है ओरिएंटल सरकस, जो भी इन खेलों को देखने से चूक जायेगा वह ज़िन्दगी भर अपने को कोसता रहेगा  

फारबिसगंज के निवासियों, बच्चेबूढ़ेजवान, औरत, मर्द सब के लिए केवल एक ही मौका है, आइये भारी तादाद में पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखियेआपका अपना ओरिएंटल सरकस, रोजाना चार  शो, ठीक तीन, पांच, सात और नौ बजे, पहला शो ठीक तीन बजे शुरू हो जायेगा, टिकट दर, फर्स्ट क्लास डेढ़ रुपैया, सेकंड क्लास एक रुपैया और थर्ड  क्लास केवल  बारह आनाजरूर से आईयेदेखना मत भूलिए, आपका अपना ओरिएंटल सरकस”  

अभी सरकस  वाला बैंड बाजा सामने से ओझल हुआ ही था कि एक और बैंड की आवाज सुनाई दीयह बैंड बाजा  तो पहले से भी बड़ा था, सामने में "मूसा  बैंड"  का बड़ा बड़ा बैनर  लिए दो आदमी चल रहा था, ठीक उसके पीछे बड़े बड़े पोस्टर, पता चला कि फिलिम नागिन का प्रचार वाला है, बड़े जोर शोर से से माइक पर उदघोषणा कर रहा था ......................!

आज से आपके मेले में आ गया, आ गया, आ गया पहली बार विजय टाकिज के रुपहले परदे पर, पूरे परिवार के साथ जरूर  देखियेइस साल की सब से सुपर हीट फिलिम "नागिन", जिसके मुख्य कलाकार हैं, "प्रदीप कुमार और बैजंती मालासाथ  में हैं .............. !

फिलिम नागिन का संगीत दिया है फिलिम जगत के मशहूर संगीतकार "हेमंत कुमार" ने, इस फिलिम के गाने ने रिकार्ड तोड़ सफलता हासिल की है और पिछले सभी गाने का रिकार्ड तोड़ दिया है, सुनिए इसी फिलिम के एक गाने की झलक, और 

फिर बज उठा "मन डोले मेरा तन डोले, ...........................................! 

फिलिम के बीन की जादू पर सांप भी खींचे  खींचे चले आते हैं, देखिये पहली बार सुपर हीट गाने ईस्टमेन कलर में, रोजाना तीन शो, दोपहर साढ़े तीन बजे, शाम साढ़े छः बजे और रात्रि साढ़े नव बजे, माइक पर उदघोषणा करते करते बैंड पार्टी का कारवां आगे निकल पड़ा।

तरह  तरह के प्रचार, "अपनी बालों की सुरक्च्छा के लिए इस्तेमाल कीजिये यह जडी बूटी वाला हिमालय  तेल, हिमालय की तराई में पाए जाने वाले गुम हो चुके बहुमूल्य जडी बूटियों से हिमालय में ही रहने वाले ऋषि मुनिओं द्वारा तैयार किया हुआ हिमालय  तेल, जिसे  हिमालय तेल कमपनी ने केवल आपके लिए एक रुपैये में लाया है", आईये, और अभी खरीदें, स्टाक सिमित है" 

पूरे मेले की अवधि में पूरा शहर इसी तरह प्रचार वाले की शोर में डूबा रहता, कभी "चश्मा गोला साबुन ही इस्तेमाल करिए", तो कभी, "मजबूत दांतों के लिए लाल दन्त मंजन, बस एक चुटकी भर मंजन , और दांत मोती की तरह सफ़ेद" 

और प्रचार का कभी न ख़तम होने वाला यह सिलसिला चलता रहता, चलता रहता, चलता रहता”......................................................................................!
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क्रमश: (आगे की कहानी के लिए खंड ४  देखें)

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